Welcome At Freshwater Pearls Farming


Freshwater Pearl Farming In Jaipur - Pearl Farming Training & Research Center In Jaipur

"अब मीठे पानी में हो सकेगी मोती की खेती; टोंक जिले के मत्स्य फार्म में होगा डेमो"

>> किसानों को मोती की खेती करने के तरीकों का प्रशिक्षण और इससे होने वाले फायदे की जानकारी दी जाएगी !

>> मत्स्य पालन विभाग ने बीसलपुर से करीब पचास किलोमीटर दूर के मत्स्य फार्म को मोती पालन के डेमो सेशन यूनिट के लिए चुना है।

>> मोती की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसानों को सहायता के लिए 40% से 60% फीसदी अनुदान राशि भी देगी। देश में मोती पालन ज्यादातर दक्षिणी राज्यों में किया जाता है। इसी तर्ज पर अब प्रदेश में भी किसानों की आय बढ़ाने व रोजगार के अवसर मुहैया कराने को लेकर यह पहल की जा रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मछली पालन की तरह सरकार मोती पालन को भी बढावा देना चाहती है।

- मोती पालन के लिए एक हैक्टेयर में इकाई की लागत 25 लाख रु., उसमें 25 हजार सीपों का संचयन संभव।
- सामान्य वर्ग को 40% और एस.टी.-एस.सी., महिला और सहकारी संस्थाओं को 60%अनुदान राशि दी जाएगी।
- मोती पालन करने वालों को डेमो सेशन के तहत ट्रेनिंग दी जाएगी।

इस मोती का उपयोग
- ज्वैैलरी व सजावटी सामान बनाने के काम आता है
- इससे जल शुध्दिकरण भी होता है
- इसका इत्र भी तैयार होता है
- आयुर्वेदिक दवा में मोती भस्म के रुप में भी काम आता है।

मीठे पानी के मोती पालन या मोती की खेती के लिए डेमो सेशन यूनिट लगाया जाएगा। अगर किसान मोती की खेती करते हैं तो एक हैक्टेयर से 3 लाख रुपए वार्षिक आय संभव है।
-राकेश देव, जिला मत्स्य विकास अधिकारी, टोंक


राजस्थान में मोती की खेती का प्रक्षिशण

**प्रशिक्षण दिवस : जयपुर ट्रेनिंग सेंटर पर**


Day-1: शनिवार ( समय सुबह 10:00 से 02:00 बजे तक )
Day-2: रविवार (समय सुबह 10:00 से 02:00 बजे तक )


Details for Freshwater Pearl Farming Training In Udaipur **

Day-1: शनिवार ( 27/10/2018 - समय सुबह 10:00 से 02:00 बजे तक )
Day-2: रविवार (28/10/2018 - समय सुबह 10:00 से 02:00 बजे तक )


अधिक जानकारी के लिए दिए गए नंबर 9672868980 पर संपर्क करें, व आगे की मोती की खेती के प्रशिक्षण के लिए साइट विजिट करते रहें

अगले पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम की जानकारी के लिए कृपया पुनः विजिट करें ....

** प्रशिक्षण शुल्क मात्र: 4,000/- रुपये

असुविधा से बचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाएं ....


⇒ Payment Details For Registration (Pay Rs. 500/- for Registration)

⇒ Training Center Address

For Pearl Farming Training Info (मोती की खेती से सम्बंधित जानकारी व् मोती की खेती की ट्रेनिंग से सम्बंधित किसी भी जानकारी के लिए)
Call US @ 9672868980 or Mail us @ hello@freshwaterpearlsfarming.com


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- आप किसी भी स्थान पर मोती की खेती कर सकते हैं
- मोती की खेती का प्रशिक्षण कहां से लें ? खेती कैसे करें व उसके बाद इस व्यवसाय को कैसे स्थापित करे ?? ..
अगर आप भी इस तरह के सवालों से परेशान हैं और मोती की खेती का प्रशिक्षण लेना चाहते हैं तो इस तरह की सभी जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें ... व " कम लागत व अधिक मुनाफे वाले व्यापर में प्रवेश करें

- सम्पूर्ण व्यावहारिक और सैद्धांतिक जानकारी
- Printed गाइड
- प्रशिक्षण के बाद भी 24 x 7 सहायता
- सेटअप स्थापित करने में पूर्ण सहयोग
- सभी आवश्यक टूल्स उचित दामों पर उपलब्ध

अधिक जानकारी के लिए # 9672868980 पर संपर्क करें


How Much Does It Costs To Start Freshwater Pearl Farming In Rajasthan

– You can start Pearl farming with as low as 35,000/- approx. to deploy 1000 Oysters (Seeps)

How Freshwater Pearls Are Built ?
– In pearl farming you build Pearls as they are built in Seas in natural environment in any oyster. Pearls farming in done in the same ways and you use Oysters to build fresh water pearls.

Can We Start Freshwater Pearl Farming At Our Home?– Yes you can start Pearl farming at your Home as well, and you will no need to have any Pond as you can start pearls farming at small scale and can use Small Tanks for the farming purpose. You can use plastic tanks or tanks built with ferrocement.

Do We Need To Take Cate OF Oysters On Daily Bases– Yes initially you will need to take care of them regularly twice a days but latter when the get adjusted in the local environment you will need not to give much time on daily bases.

Pearl Farming Preparation & Formation – Gallery

 

Process or Steps Involve In Freshwater Pearl Farming – Pearl Farming Training Process consists mainly 6 steps
(1) Collection of Mussels or Oysters
(2) Make the collected Oysters environment friendly (because mussels are collected from different sources and thus they needs to be settled down before using them for marking)
(3)Surgery or Nucleus Insertion
(4)Post Surgery Care
(5)Re-location them after surgery into the prepared pond, and
(6)Finally pearl production

Pearl Oyster Farming and Freshwater Pearl Culture Training In India

is originally developed and Introduced by the Central Marine Fisheries Research Institute and later they started offering Pearl Culture training to candidates under different state Govt. sponsorship program as the mind set behind this was to extend the technical know-how to end-users.

Initially when they started giving the Freshwater Pearl Farming Training In India it was a long duration course of six-month later the course was replaced with a short-term course of 4-6 weeks. And now you can get train taking a 2 days course anywhere in India but it does not mean that you will not learn each and everything as the course duration is too short … rest assured as all the Pearl Farming aspects are covered in this 2 days pearl cultural training program.

You will learn Everything like anatomy of Oysters, where they are found, How to clean and sort Oysters, how to prepare them for pearl cultural, you will learn about all the required tools, medicines, nucleus and most importantly all the Nucleation techniques.

Everything You Should Know About Freshwater Pearl Farming Training In India
(जानिये भारत में मीठे पानी में मोती की खेती के लिए क्या व कैसे करें)

भारत में मोती की खेती की प्रचुर संभावनाएं हैं। मोती की खेती पानी में होने वाला ऐसा व्यवसाय है, जिसकी तकनीक के बारे में पूरी जानकारी जरूरी है। छह चरणों में मोती उत्पादन होता है।
सीप में रेत, कीट जैसी कोई वस्तु प्रवेश कर जाती है और सीप उसे बाहर नहीं निकाल पाता तो मोती का निर्माण होता है। इस वस्तु पर चमकदार परतें जमा होती हैं जो मोती का स्वरूप लेती हैं।
ताजा पानी में मोती उत्पादन के चरण (Steps for Freshwater Pearl Farming)
1- सीपों को एकत्र करना: सीपों को तालाब, नदी आदि से एकत्र किया जाता है। इसके बाद इसे बरतन या बाल्टियों में रखा जाता है। इसका आदर्श आकार 8 सेंटीमीटर से अधिक होता है
2- अनुकूल बनाना: सीपों को 10-15 दिनों तक अपने बनाये हुए टैंक में अनुकूलन के लिए रखा जाता है जिस से वो नए वातावरण के अनुसार आपने को ढाल लें, इसके बाद जब सर्जरी के लिए तैयार करना हो तो उनको 2 घंटे पहले पोंड से बाहर निकाल कर रखा जाता है इसके इसकी मांसपेशियां ढीली पड़ जाएं और सर्जरी में आसानी हो।
3- सर्जरी: सीपों की सर्जरी में सतह की कोशिका और प्रजनन अंगों की सर्जरी शामिल हैं। सर्जरी के लिए न्यूक्लियाई उपयोग में आते हैं, जो सीप के खोल या अन्य कैल्शियम युक्त सामग्री से बनाए जाते हैं।
4- देखभाल: सर्जरी के बाद इन सीपों को नायलॉन बैग में 7 दिनों तक एंटी बायोटिक और प्राकृतिक चारे पर रखा जाता है। रोजाना इनका निरीक्षण किया जाता है। मृत सीपों को बाहर हटा लिया जाता है। इसके बाद सीपों को तालाबों में डाल दिया जाता है, इन्हें नायलॉन बैगों में रखकर तालाब में एक मीटर की गहराई पर छोड़ दिया जाता है।
9 से 11 माह की अवधि के बाद सीपों को निकाल लिया जाता है व कोशिका या प्रजनन अंग से मोती निकाल लिया जाता है।
You Can call us Between 8:00 a.m. to 7:00 p.m for getting any information which is related or required to start your Freshwater pearl farming Training or setting up Freshwater pearl Farming Business in Jaipur, Rajasthan or anywhere in India, we will try to provide you every single bit of information which could help you making the things in the right directions.

Why Freshwater Pearl Farming Training Is Required

– Unlike other technical business Freshwater Pearl Farming also requires some technical Training. To establish your pearl farming business successfully you need Freshwater Pearl Farming Training. After taking pearl farming culture training you will be able to to run your business without any issues.

Where One Need To Go To Take Freshwater Pearl Farming Training

– You can take Peal Farming Training from any Institute, but before visiting any institute for Pearl Farming Training you mush visit their website or try to collect as much as information you can collect so that you can determine whether the institute is legit of fake.

We also provide Freshwater Pearl Farming Training at our Jaipur and other Training Center. We are in the business for more than 3 years and from last year ( April 2017) we started offering Pearl Culture Training and since than we have given Freshwater Pearl Farming Training to more than 200 Trainees.

We are Running Govt. Reg. NGO and have Pvt. Ltd. company registered. We offer Training Certificate to all our Successful trainees who have completed Pearl Farming Training from our Center.

Is There any Qualification One Should have To Take Freshwater Pearl Farming Training

No, any one can take Freshwater Pearl Farming Training. Men, Women, any unemployed or Employed is eligible for taking Pearl Culture Training.
Best thing is with Pearl Farming Training is one can get trained in only 2 Days of Training.

How To Set Freshwater Pearl Farming Business Up After Getting Training …

Once you are done with Pearl Farming Training, you will have almost every bit of information on What is Freshwater Pearl Farming and How one can set own Pearl Farming Business Up easily.
and moreover this we are always there to help you at every step of Setting your Pearl Cultivation Business Up. We will help you getting all the required Raw Material at the lowest Cost possible.

And will guide you what and how to do ….